क्या चौकी इंचार्ज के संरक्षण से चल रहा है अवैध कारोबार
रायबरेली। शहर के त्रिपुला चौकी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध लकड़ी के कारोबार की चर्चाओं के बीच अब बड़ी मात्रा में लकड़ियों की आवाजाही से जुड़े मामले सामने आने लगे हैं…ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि चौकी क्षेत्र से नियमित रूप से लाखों रुपये कीमत की लकड़ी की खेप गुजर रही है और बडी मात्रा में रेवती राम तालाब के गेट के नजदीक से लोड होती हैं अवैध लकडियां अब सवाल तो यही है स्थानीय पुलिस और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है… क्या सच में चौकी इंचार्ज के संरक्षण व वन विभाग की मेहरबानी से फल फूल रहा कारोबार…?चौकी प्रभारी की कार्यशैली को लेकर पहले से उठते रहे सवालों के बीच अवैध लकड़ी की कथित सप्लाई ने पुलिस की सतर्कता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। स्थानीय स्तर पर ये चर्चा लम्बे समय से है कि अवैध रूप से लकड़ी की आवाजाही बिना चौकी इंचार्ज के संरक्षण या जानकारी के लंबे समय तक संभव नहीं हो सकती…मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यदि लकड़ी वैध स्रोत से नहीं आ रही है तो उसके परिवहन, कटान और सप्लाई की पूरी श्रृंखला की जांच जरूरी है….ऐसे में सवाल सीधे त्रिपुला चौकी की निगरानी व्यवस्था और वन विभाग की भूमिका पर खड़ा होता है चौकी क्षेत्र से लगातार बड़ी मात्रा में लम्बे समय से लकड़ी गुजर रही है तो पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी या फिर चौकी इंचार्ज के संरक्षण में ही चल रहा खेल…? वन विभाग की निगरानी में यह गतिविधि कैसे चलती रही..? और यदि पुलिस को जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई…? अब जरूरत चर्चाओं की नहीं, बल्कि लकड़ी की खेप, वाहन, परिवहन दस्तावेज, स्रोत, गंतव्य और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की है। जांच ही यह स्पष्ट कर सकती है कि मामला महज वैध लकड़ी के परिवहन का है या इसके पीछे वास्तव में कोई संगठित अवैध कारोबार चल रहा है।



