फरियाद से मौत तक नहीं जागी सलोन की खाकी, पिता की मौत के बाद भी मुख्य आरोपी गिरफ्त से बाहर
प्रत्यक्षदर्शी बेटी की तहरीर दरकिनार, वृद्ध मां से बदली गई तहरीर! अब मुख्य आरोपी पर पुलिस खामोश
सलोन की खाकी का खेल तहरीर से कुल्हाड़ी कराया गायब, मेडिकल में धारदार औजार की चोट

रायबरेली। क्या सलोन की खाकी का पैटर्न जिले के खाकी के अफसरो को समझ आता है या नही ये तो अफसर ही जाने मतलब पहले समझौते की आड़, फिर वारदात की मार अब मुख्य आरोपी फरार… दरअसल सलोन कोतवाली क्षेत्र के बिसइया मजरे पूरे झाऊ में छेदीलाल की मौत ने केवल एक परिवार की त्रासदी सामने नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि संपत्ति और रुपये के लालच में बेटों ने अपने ही पिता पर कुल्हाड़ी से हमला कर उनका पैर काट दिया….करीब बीस दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद छेदीलाल की मौत हो गई, लेकिन घटना के मुख्य आरोपी घनश्याम की गिरफ्तारी सलोन पुलिस अब तक ना कर सकी जिससे खाकी की कार्रवाई पर सवाल उठना लाजमी है….मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है कि छेदीलाल पहले से ही अपने बेटों विजय और घनश्याम के कथित उत्पीड़न से परेशान थे और कार्रवाई की गुहार सलोन थाने से लेकर जिला मुख्यालय तक लगाते रहे। आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय सलोन थानेदार द्वारा कई बार पिता-पुत्र के बीच दबाव बनाकर समझौता करा दिया गया….बताया जाता है कि कथित समझौता-प्रवृत्ति से आरोपियों के हौसले बढ़े और आखिरकार वह घटना हो गई, जिसका खामियाजा छेदीलाल को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा…सबसे गंभीर सवाल घटना के बाद की पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहा है…चर्चा यह है कि रसूखदार मुख्य हत्यारा घनश्याम को बचाने के लिए खाकी ने पूरी ताकत लगा दिया। मृतक छेदीलाल की बेटी मनीषा जिसे कमरे में बंद करके अधेड़ का पैर काटा गया और फिर मनीषा के द्वारा प्रत्यक्ष घटनाक्रम के आधार पर पुलिस को तहरीर दी थी…इसके बावजूद थानेदार ने उसकी तहरीर को दरकिनार कर वृद्ध व बीमार मृतक की पत्नी से तहरीर लिया,जिसमें कुल्हाड़ी से पैर काटने का जिक्र था तो तहरीर से कुल्हाड़ी शब्द हटवाकर लाठी डंडों से पीटने का उल्लेख करवाया। जबकी मेडिकल परीक्षण में धारदार औजार से घाव का जिक्र है। अब सवाल यह है कि यदि घटना में धारदार हथियार के इस्तेमाल का आरोप था और मेडिकल रिपोर्ट में भी धारदार औजार से चोट का उल्लेख है, तो तहरीर में घटना का स्वरूप बदलने की जरूरत क्यों पड़ी…?घटना के करीब 17वें दिन बड़े बेटे विजय को जेल भेज दिया गया, लेकिन दूसरा जो मुख्य आरोपी है घनश्याम अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। यही वह बिंदु है जहां सलोन पुलिस की कार्रवाई कठघरे में खड़ी दिखाई देती है। मृतक के छोटे बेटे व बेटियों ने बताया कि घनश्याम शहर में कमाता है और कथित तौर पर यह कहकर धमकाता था कि साहब से बात हो गई है, मुझे कुछ नहीं होगा। किसी दिन तुम लोगों कि भी हत्या कर दूंगा। डरे सहमें मृतक के परिजनों ने मुख्य हत्यारोपी घनश्याम को जल्द दबोचकर जेल भेजे जाने कि मांग कि है। अब सवाल केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी का नहीं है। सवाल यह है कि जिस पिता ने कथित उत्पीड़न से परेशान होकर पहले ही मदद की गुहार लगाई थी, उसकी शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हुई होती तो क्या मामला इस हद तक पहुंचता..? क्या पुलिस ने पहले की शिकायतों को गंभीरता से लिया था..? यदि लिया था तो पिता-पुत्र के बीच समझौते के बाद भी विवाद दोबारा हिंसक रूप में कैसे सामने आया….?


