जिस्म पर गोली का जख्म, विवेचना में खरोंच! कल्यानपुर गोलीकांड की अंतिम आख्या सवालों के घेरे में
एम्स ने दर्ज किया गोली का घाव, पुलिस ने लगा दी अंतिम आख्या कल्यानपुर कांड में पीड़िता की न्यायिक लड़ाई जारी
रायबरेली। खाकी जब जोर लगाती है कितना भी धरा रहे साक्ष्य, अपराधी को साफ बचाती है….नवंबर 2025 का एक ऐसा मामला जिसने जिले भर के पुलिसिया और अपराधियों के गठजोड़ को साफ-तौर पर आइना दिखाया है। लगातार नामजद तहरीर मुकदमा और प्रत्यक्षदर्शी व भुक्तभोगी के बयान के बावजूद अंततः खाकी ने इस रहस्यमई गोली कांड में अंतिम आख्या लगाकर अपना पल्ला तो छुड़ा लिया….किंतु सवाल उठता लाजमी है कि यदि खाकी के कमाऊ पुत्रो ने गोली नहीं चलाई तो आखिर वह कौन था जिसने राहुल नाम के युवक कि शरीर पर गोलियों के जख्म दिया था….? जानकारी के मुताबिक शुरुआत में पुलिस ने अपने हाथों से गोली मार लेने कि कहानी रचने कि कोशिश किया था किंतु खाकी के हांथ इस झूंठ को लिखने में तब कांप उठे जब पीड़ित हाईकोर्ट लखनऊ कि शरण में निष्पक्ष जांच के लिए जा पहुंचा। गोली के जख्म युवक कि शरीर पर ऐसी जगह थे जहां अपने हाथों से भी गोली मार पाना नामुमकिन था…. खाकी ने आरोपियों को बचाने में पूरी ताकत झोंक दी जिसकी सजा यह मिली कि हाईकोर्ट खंड पीठ लखनऊ तक में तत्कालीन एसपी तक को चक्कर काटना पड़ा। शातिरों को बचाने के लिए खाकी ने पूरी ताकत झोंक दी अंततः 30 जून को न्यायालय फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दिया…. जिसको पीड़िता ने न्यायालय में चुनौती देकर खाकी कि बखिया उधेड़ी है। दरअसल पूरा मामला जिले के भदोखर थाना क्षेत्र स्थित कल्यानपुर रैली गांव का है जहां राहुल प्रसाद नाम के दलित युवक को शातिराने अंदाज से गोली मारी गई थी….गोली लगने से घायल युवक कि माता गुड्डा देवी कि तहरीर पर मुश्किल से पुलिस ने हत्या के प्रयास का उसी गांव निवासी रामसहाय, बीरेंद्र, धीरज व विद्याकांत त्रिवेदी के विरुद्ध जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया…. जिसके बाद पुलिस ने रसूखदारों को बचाने का ताना-बाना बुन डाला। इधर युवक घायल अवस्था में एम्स रायबरेली में जूझ रहा था। एम्स कि रिपोर्ट में गोली से घाव होने कि पुष्टि किया। उधर तत्कालीन सीओ अरुण नौहार ने खरोंच आने कि बात कह डाली…. जिसको लेकर घायल कि मां गुड्डा देवी ने हाईकोर्ट लखनऊ में याचिका दाखिल किया। जहां मुकदमा संख्या 11020 कि सुनवाई में तत्कालीन एसपी यशवीर सिंह ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया था….विवेचना सीओ महराजगंज प्रदीप वर्मा को सौंपीं गई थी किंतु जैसे ही एसपी यशवीर ने जनपद छोड़ा 30 जून को हाईकोर्ट लखनऊ में सुनवाई लम्बित होने के बावजूद मुकदमा संख्या 484/2025 में अंतिम आख्या प्रेषित कर चारों आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायालय में अंतिम आख्या स्वीकार नहीं हुई पीड़िता ने विवेचक पर सवाल खड़े करते हुए आपत्ति दाखिल किया….किंतु शातिराने अंदाज से गोली कांड को अंजाम देने वाले पूरे में अफवाह फैला दिए कि हम बरी हो गए। जबकी मुकदमा संख्या 484/2025 कि सुनवाई भी लम्बित है और हाईकोर्ट में भी याचिका लम्बित है…. किंतु खाकी मेहरबान तो अपराधी पहलवान कि कहावत जो सही चरितार्थ साबित करना है। तो चर्चाएं तो जिले भर में भदोखर पुलिस कि काबिल पुलिस कि होगी ही। पीड़िता गुड्डा देवी के अधिवक्ता ने बताया कि मुकदमा संख्या 484/2025 में आपत्ति दाखिल है…. पुलिस कि विवेचना में आधा दर्जन से अधिक बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है जिसका जवाब पुलिस के पास नहीं है। यह मुकदमा बिना पीड़िता का पक्ष सुने निस्तारित नहीं हो सकता। आरोपियों के बरी होने कि बात महज अफवाह है।



