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हिरासत में था युवक तो अस्पताल के पास मारपीट कैसे..? सवालो के घेरे में सलोन पुलिस

हिरासत में था युवक तो अस्पताल के पास मारपीट कैसे..? सवालो के घेरे में सलोन पुलिस

थाने में पिटाई, ₹8,300 छीनने का आरोप, हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगा 24 घंटे का CCTV फुटेज



रायबरेली। जिस युवक को पुलिस हिरासत में रखे जाने का दावा किया जा रहा है, उसी पर अस्पताल के पास मारपीट करने की कार्रवाई का आरोप है। घटनाक्रम के इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। युवक ने थाने में पिटाई करने और ₹8,300 छीनने का आरोप लगाया है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहुंचा तो अदालत ने बीते दिनो संबंधित थाने के मुख्य द्वार पर लगे CCTV कैमरे की 24 घंटे की फुटेज और युवक के मोबाइल की लोकेशन का सत्यापन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश के बाद अब सवाल है कि पुलिस की कार्रवाई और युवक के आरोपों के बीच वास्तविक घटनाक्रम क्या था…? याचिकाकर्ता दीपक कुमार पांडेय के अनुसार, उसने जुलाई 2026 में सनी मौर्य के खिलाफ IGRS पर शिकायत की थी। आरोप है कि शिकायत के संबंध में थाना प्रभारी ने 25 अगस्त को गलत रिपोर्ट लगाई और बाद में उसका भी चालान कर दिया गया। युवक का दावा है कि 6 सितंबर की रात करीब आठ बजे उसे कांस्टेबल संतोष शुक्ला के घर से हिरासत में लिया गया। इसके बाद थाने में उसके साथ मारपीट की गई और ₹8,300 छीन लिए गए। उसने 7 सितंबर तक थाने में रखे जाने का भी आरोप लगाया है। विवाद का सबसे अहम पहलू 7 सितंबर को हुई कार्रवाई है। आरोप के मुताबिक, पुलिस ने यह कहते हुए कार्रवाई की कि युवक ने नेहाल अस्पताल के पास सनी मौर्य के साथ हाथापाई की थी। लेकिन युवक का कहना है कि उस समय वह पहले से ही पुलिस हिरासत में था। यदि उसके दावे की पुष्टि होती है, तो कथित हाथापाई के समय और पुलिस कार्रवाई के आधार पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। वहीं, वास्तविक स्थिति का निर्धारण साक्ष्यों के सत्यापन से ही हो सकेगा। इसी घटनाक्रम की तह तक पहुंचने के लिए हाईकोर्ट ने 6 सितंबर शाम सात बजे से 7 सितंबर शाम सात बजे तक थाने के मुख्य द्वार के CCTV फुटेज और याचिकाकर्ता के मोबाइल की लोकेशन की जांच कर जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता को इसके लिए 10 दिन का समय दिया गया। मामले की अगली सुनवाई आने वाले कल 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। अब सवाल सीधे पुलिस की कार्यशैली पर है युवक को कब हिरासत में लिया गया, उसे कब छोड़ा गया और कथित हाथापाई के समय उसकी वास्तविक लोकेशन क्या थी..? क्या CCTV फुटेज और मोबाइल लोकेशन आरोपों की पुष्टि करेंगे या घटनाक्रम की कोई दूसरी तस्वीर सामने आएगी…? इन सवालों का जवाब पुलिस के दावों से नहीं, बल्कि जांचे-परखे साक्ष्यों से मिलेगा। हालांकि, माननीय हाईकोर्ट ने अभी पुलिस को दोषी नहीं ठहराया है और न ही युवक के आरोपों पर अंतिम मुहर लगाई है।अदालत ने तथ्यों के सत्यापन का निर्देश दिया है। अब निगाहें अगली सुनवाई पर हैं।

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