कानूनराज में जिस हरकत से बिगड़ सकता था सामाजिक सौहार्द, उसी को अंजाम देकर निकल गए अराजक तत्व
प्रतिमा पर कीचड़, गांव में आक्रोश गदागंज पुलिस की निष्क्रियता के बीच सीओ-एएसपी को संभालना पड़ा मोर्चा
रायबरेली। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर कीचड़ पोतने की घटना ने गदागंज थाना क्षेत्र के बाबूरिहा गांव में पुलिस की सतर्कता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए….कजियाना ग्राम पंचायत में सामने आई इस घटना ने देखते ही देखते ग्रामीणों और बाबा साहेब के अनुयायियों में आक्रोश पैदा कर दिया। मामला केवल प्रतिमा को गंदा किए जाने तक सीमित नहीं था, बल्कि सार्वजनिक रूप से स्थापित ऐसी ऐतिहासिक शख्सियत की प्रतिमा के साथ की गई हरकत के कारण इसके सामाजिक प्रभाव की गंभीरता कहीं अधिक थी….यही वजह रही कि स्थिति बिगड़ने से पहले सीओ डलमऊ और एडिशनल एसपी रायबरेली को भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचना पड़ा….प्रतिमा पर कीचड़ पोते जाने की जानकारी सामने आते ही गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी और नाराजगी बढ़ने लगी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रतिमा को साफ कराया, लेकिन अराजकता फैलाने की कोशिश करने वाले व्यक्ति की पहचान और गिरफ्तारी कर पाने में गदागंज पुलिस नाकाम रही…. ऐसे में थानेदार गदागंज की सक्रियता व कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होना लाजमी है कि गदागंज थानेदार के राज में अराजक तत्वों के हौसले अराजकता फैलाने में कैसे बुलंद हो गए…? बाबा साहेब की प्रतिमा किसी सामान्य सार्वजनिक स्थल की प्रतिमा नहीं है। उनसे जुड़ी भावनाएं समाज के बड़े वर्ग से जुड़ी हैं…ऐसे में प्रतिमा पर कीचड़ पोतने जैसी घटना को हल्के में लेना महज एक स्थानीय विवाद को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि उसके संभावित सामाजिक प्रभाव से आंखें मूंदना माना जा सकता है….गांव में यदि समय रहते पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिश न होती तो मामूली दिखने वाली यह घटना अनावश्यक तनाव का कारण बन सकती थी…मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ डलमऊ और एडिशनल एसपी का मौके पर पहुंचना पुलिस प्रशासन की गंभीरता को जरूर दर्शाता है…अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत की और उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी तथा अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अनुयायियों का आक्रोश शांत हुआ और स्थिति नियंत्रण में आई…हालांकि, आला अधिकारियों के पहुंचने के बाद हालात संभल जाना स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी पर उठे सवालों को खत्म नहीं करता..अराजक तत्वों का यह दुस्साहस क्षेत्र में पुलिस के खौफ को लेकर भी सवाल खड़ा करता है। फिलहाल स्थिति शांत है, लेकिन घटना ने गदागंज पुलिस की सक्रियता पर ऐसी छाप जरूर छोड़ी है, जिसे महज प्रतिमा साफ करा देने से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता… मामले में सीओ डलमऊ गिरजा शंकर त्रिपाठी ने बताया की जांच जारी है अभी तक फिलहाल अराजकता फैलाने की कोशिश करने की पहचान नहीं हो पाई, हालांकि किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने की कोशिश किसी के द्वारा की जाती है तो उस पर कठोरता कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।



