रिपोर्टर । रूमान अली ।
कानपुर में अवैध बाइक टैक्सियों के संचालन को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होते नजर आ रहे हैं।
सर्व समाज एकता एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने अवैध रूप से संचालित बाइक टैक्सियों के विरोध और 5 हजार से अधिक पंजीकृत ऑटो चालकों की आजीविका पर मंडरा रहे संकट को लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने का ऐलान किया है।
एसोसिएशन का आरोप है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप आधारित एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा मोटर वाहन अधिनियम और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की जा रही है।

कानपुर में परिवहन व्यवस्था और ऑटो चालकों की रोजी-रोटी से जुड़ा मामला एक बार फिर सामने आया है।
सर्व समाज एकता एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री **आकाश मिश्रा** की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि शहर में ऐप आधारित कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर बाइक टैक्सियों का संचालन किया जा रहा है।
एसोसिएशन का कहना है कि इन बाइक टैक्सियों के कारण जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं कानपुर नगर में ई-रिक्शा, ऑटो और परमिटधारी टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखने का फैसला किया है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि शहर में संचालित हो रही बाइक टैक्सियों को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, और हजारों पंजीकृत ऑटो चालकों की आजीविका बचाने के लिए प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं


