छात्र निकला लूट का मास्टरमाइंड! गूगल मैप से तलाशा टारगेट, छह गिरफ्तार
एसओजी-सर्विलांस की मदद से खुला लूट का राज, छह आरोपी लूट के माल समेत गिरफ्तार

रायबरेली। बछरावां में सराफा कारोबारी से हुई लूट महज अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित तैयारी और तकनीक के इस्तेमाल की कहानी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, लूट के मुख्य आरोपी बीएससी ओटीटी का छात्र सौरभ शर्मा ने गूगल मैप के जरिए ग्रामीण क्षेत्र में सुनार की दुकानों की तलाश की…असहन जगतपुर स्थित शिव ज्वैलर्स को चिन्हित करने के बाद पहले रेकी की गई और तीन दिन बाद साथियों के साथ मिलकर बारिश के बीच कारोबारी को रास्ते में रोककर उसके सिर पर डंडे से वार कर बैग लूट लिया गया…घटना के 36 घंटे के भीतर बछरावां पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने छह आरोपियों को लूटे गए सामान और वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार समेत गिरफ्तार कर लिया…. 26 सितंबर को शिवगढ़ क्षेत्र के असहन जगतपुर स्थित शिव ज्वैलर्स बंद कर घर लौट रहे ऋषि कुमार सोनी को तिलेण्डा स्थित जिलेदार गेस्ट हाउस से करीब 500 मीटर आगे कार सवार बदमाशों ने ओवरटेक कर रोक लिया था…विरोध करने पर सिर पर डंडे से वार किया गया और पीठ पर टंगा बैग छीनकर आरोपी फरार हो गए। बैग में करीब 650 ग्राम सफेद धातु और 11 ग्राम पीली धातु के आभूषण बताए गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एसपी रवि कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण कर खुलासे के लिए टीमें गठित की थीं।पुलिस की जांच में सामने आया कि वारदात की पटकथा घटना से तीन दिन पहले लिखी जा चुकी थी। पुलिस पूछताछ में सौरभ शर्मा ने बताया कि वह लखनऊ में रहकर बीएससी ओटीटी की पढ़ाई कर रहा है और अपने खर्च के लिए कार को ओला टैक्सी के रूप में चलाता है। कोर्स की फीस और अन्य जरूरतों के लिए करीब 50 हजार रुपये की जरूरत होने का दावा करते हुए उसने साथियों के साथ लूट की योजना बनाई। इसके बाद गूगल मैप के जरिए बछरावां और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सुनार की दुकानों को तलाशा गया। पुलिस के मुताबिक 23 सितंबर को आरोपियों ने असहन जगतपुर पहुंचकर शिव ज्वैलर्स की रेकी भी की थी, लेकिन उस दिन वारदात नहीं कर सके। इसके बाद 26 सितंबर को सभी आरोपी कार से दुकान पहुंचे। शाम करीब छह बजे बारिश के बीच दुकानदार के दुकान बंद कर मोटरसाइकिल से घर निकलने के बाद आरोपियों ने पीछा किया और जिलेदार गेस्ट हाउस के पास वारदात को अंजाम दिया। कारोबारी के घायल होकर गिरने के बाद आरोपी बैग लेकर नहर के रास्ते फरार हो गए।
*खाकी का एक्शन मोड 36 घंटे में खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार*
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी माध्यमों से जुटाई गई जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान की और 28 सितंबर को जिलेदार गेस्ट हाउस से करीब 100 मीटर आगे शिवगढ़ रोड से छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में सौरभ शर्मा पुत्र रामसागर शर्मा, आयुष कुमार गौड़ उर्फ अंशुमान पुत्र राजन गौड़ उर्फ अयोध्या प्रसाद गौड़, कृष्णा कुमार यादव पुत्र पवन कुमार यादव, अभय रस्तोगी उर्फ हर्ष रस्तोगी पुत्र श्रवण कुमार, राजनायक यादव पुत्र वीरेंद्र यादव और ओम सिंह उर्फ शुभम सिंह पुत्र मनोज सिंह शामिल हैं…आरोपियों के कब्जे से लूट का सामान और वारदात में प्रयुक्त स्विफ्ट डिजायर कार संख्या UP32 RT 9996 बरामद की गई है। बरामदगी के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 328/2026 में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई। सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है…इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी कम गंभीर नहीं है। जिस तकनीक का इस्तेमाल आमतौर पर किसी मंजिल तक पहुंचने के लिए किया जाता है, उसी गूगल मैप को आरोपियों ने कथित तौर पर सुनार की दुकान तलाशने और वारदात की जमीन तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया। पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पैसे की कथित कमी से शुरू हुई योजना आखिरकार संगठित लूट तक पहुंच गई। यही वह बिंदु है जहां परिवार, समाज और व्यवस्था तीनों के सामने यह सवाल खड़ा होता है कि आर्थिक जरूरत और आसान कमाई की चाह के बीच अपराध की राह चुनने वाले युवाओं को समय रहते रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है…हालांकि इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने वारदात के बाद आरोपियों तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन घटना यह भी दिखाती है कि अपराधी अब पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर अपराध की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण मार्गों पर कारोबारियों की आवाजाही, संवेदनशील स्थानों की निगरानी और सीसीटीवी नेटवर्क की मजबूती भी पुलिसिंग के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण चुनौती बनती जा रही है।


