कार में बेहोश मिली युवती, दो युवक फरार डलमऊ पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
रायबरेली/डलमऊ। सुरजूपुर जाने वाले मार्ग पर शनिवार को सड़क किनारे खड़ी एक कार में युवक-युवती के मिलने के मामले ने डलमऊ पुलिस की कार्यशैली पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कार में कई युवक और एक युवती मौजूद थे। लोगों के पहुंचने पर दो युवक मौके से भाग निकले, जबकि एक युवक कार में मिला और तत्काल कपड़े पहनने लगा। सूचना पर पहुंची पुलिस युवक-युवती को अपने साथ ले गई…मामले की गंभीरता उस समय और बढ़ गई, जब सामने आए वीडियो में युवती कार के भीतर बेहोशी जैसी अवस्था में पड़ी दिखाई देती है…कार का दरवाजा खुलने पर उसका आधा सिर बाहर की ओर नजर आता है। वीडियो में युवती को होश में लाने के बाद वह कथित तौर पर कहती सुनाई देती है कि उसे नहीं पता कि वह यहां कैसे पहुंची…युवती के अनुसार, चौराहे पर ही उसे बेहोश कर दिया गया था…सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि यदि युवती वास्तव में बेहोशी की हालत में मिली थी और वह खुद यह कह रही थी कि उसे घटनास्थल तक लाए जाने की जानकारी नहीं है, तो पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच, घटनास्थल की जांच, फरार युवकों की तलाश और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल किस स्तर पर की..? मामले में एक स्थानीय पत्रकार ने आरोप लगाया कि वह घटनास्थल में किडनैपिंग व गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटा रहा था इसी दौरान प्रभारी निरीक्षक ने कथित तौर पर साक्ष्यो को अपने फोन से मिटाने को कहा पत्रकार द्वारा मना करने पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने व जेल भेजने की धमकी दी। यह आरोप सही है तो सवाल केवल साक्ष्य डिलीट कराने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी उठता है कि आखिर पुलिस को घटनास्थल के संभावित साक्ष्य के उच्चाधिकारियों के पास पहुंचने श से आपत्ति क्यों थी…? घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि मौके से दो युवक भाग निकले। पुलिस की कार्रवाई का पूरा सच जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन जिस तरह युवती के बेहोश मिलने का वीडियो सामने आया है और मौके से दो युवकों के भागने की बात कही जा रही है, और वीडियो में युवती बेहोश दिखाई देती है उससे मामले की गंभीरता को दरकिनार नहीं किया जा सकता, अभी तो जांच की विषय है कि क्या वास्तव में कानून राज में महिला सुरक्षा तार तार हुई और अपहरण का मामला था..कार्रवाई से ज्यादा सवाल पुलिस की भूमिका पर डलमऊ पुलिस की कार्यशैली को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पूरे मामले की गंभीरता उच्चाधिकारियों तक उसी रूप में पहुंचाई गई, जैसी वह मौके पर दिखाई दे रही थी..? यदि युवती के बेहोश मिलने, उसके कथित बयान और दो युवकों के फरार होने जैसे तथ्य मौजूद थे, तो क्या इन सभी बिंदुओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया..? यदि नहीं, तो यह महज जांच में कमी नहीं, बल्कि गंभीर घटना की सूचना को सीमित रखने का विषय बन जाता है।

और यदि सभी तथ्य उच्चाधिकारियों को बताए गए हैं तो पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि फरार युवकों की तलाश से लेकर युवती की मेडिकल जांच और वीडियो साक्ष्य के संरक्षण तक क्या-क्या कदम उठाए गए।फिलहाल मामला कई अनुत्तरित सवाल छोड़ रहा है। कार में युवती बेहोश क्यों थी..? उसे वहां कौन लेकर आया..? मौके से भागे दो युवक कौन थे..? युवती के कथित बयान का पुलिस रिकॉर्ड क्या कहता है…? उसकी मेडिकल जांच हुई या नहीं…? और वीडियो बनाने वाले पत्रकार को वीडियो हटाने की कथित चेतावनी क्यों दी गई…? इन सवालों के जवाब पुलिस की निष्पक्ष जांच और उच्चाधिकारियों की निगरानी से ही सामने आ सकते हैं। फिलहाल डलमऊ पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है और पूरे प्रकरण में पारदर्शी जांच की जरूरत साफ दिखाई दे रही है। मामले में अपर पुलिस अधीक्षक रायबरेली ने बताया निष्पक्ष जांच तथ्यों के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।



