यूपी मंडियों में जियोटैग ऐप पर व्यापारियों का गुस्सा:कानपुर में सतीश महाना से मिलकर सौंपा ज्ञापन, नियम वापस लेने की मांग
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा लागू की गई जियोटैग ऐप व्यवस्था के खिलाफ प्रदेशभर के व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। व्यापारियों ने मंडी व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को लेकर 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा और उत्पीड़न बंद करने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले में कृषि विपणन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से दोबारा बात करने का भरोसा दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से लागू की गई वाहन जियोटैगिंग व्यवस्था को जुलाई और अगस्त दो महीने के लिए सिर्फ प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था। हैरानी की बात यह है कि ट्रायल पीरियड में ही तकनीकी और मानवीय त्रुटियों के नाम पर 451 व्यापारियों और उद्यमियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर दी गई।

इतना ही नहीं, 4 व्यापारियों से तो समन शुल्क तक वसूल लिया गया। व्यापारियों का कहना है कि जब व्यवस्था अभी प्रयोग के तौर पर चल रही है, तो इस तरह नोटिस जारी करना और जुर्माना वसूलना सीधा-सीधा उत्पीड़न है।इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और उन्हें अपनी फसल बेचने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा, दूसरे जिलों में जाने वाले छोटे वाहनों से माल बड़े ट्रकों में ट्रांसफर करने के बाद दोबारा जियोटैगिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
व्यापारियों का कहना है कि प्रदेश की 251 गल्ला व सब्जी मंडियों में से अधिकांश ग्रामीण इलाकों में हैं। वहां व्यापारी डिजिटल संसाधनों और तकनीकी दक्षता के अभाव में इस ऐप को सही से नहीं चला पा रहे हैं।


