नारेबाजी के बीच नहीं बिगड़ने दी कानून-व्यवस्था, दूसरे दिन विवाद को जांच की राह पर ले गए अधिकारी
हंगामे के बीच प्रशासन की जिम्मेदार भूमिका, सीओ की सक्रियता से कानून-व्यवस्था कायम डीएम ने लिया संज्ञान
रायबरेली। फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में सदस्यता अभियान को लेकर उठा विवाद भले ही पहले दिन पुलिस मुख्यालय तक पहुंचकर तनावपूर्ण हो गया, लेकिन पुलिस-प्रशासन की सक्रियता ने स्थिति को टकराव में बदलने नहीं दिया। शुक्रवार को घटनाक्रम ने नया रुख लिया। बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे तो डीएम ने उनकी शिकायत सुनी, ज्ञापन लिया और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए तीन दिन का समय मांगा। प्रशासन के इस रुख से विवाद को सड़क और नारेबाजी से निकालकर अब तथ्य, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया में ले जाने की दिशा साफ दिखाई दे रही है…विवाद की शुरुआत कॉलेज गेट पर सदस्यता अभियान के बैनर को लेकर हुई थी। कहासुनी के बाद सपा छात्र सभा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ा और दोनों पक्ष जिला पुलिस मुख्यालय पहुंच गए। कप्तान कार्यालय परिसर में आमने-सामने प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच स्थिति संवेदनशील जरूर हुई, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने संयम के साथ मोर्चा संभाला। अपर पुलिस अधीक्षक, सीओ सदर आशीष निगम समेत अधिकारियों की सक्रियता से स्थिति नियंत्रित रही और किसी बड़े टकराव की नौबत नहीं आने दी गई। दूसरे दिन प्रशासन की भूमिका शिकायतों को सुनने और समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही। सपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। डीएम ने उनकी बात सुनी और स्पष्ट किया कि प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई होगी। तीन दिन का समय लिए जाने से प्रशासन ने तत्कालिक दबाव के बजाय पूरे मामले को तथ्यों के आधार पर देखने का संकेत दिया है। इसी बीच शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो पुलिस की सक्रिय कार्यशैली को लेकर चर्चा में आ गया…वीडियो में सीओ सिटी आशीष निगम प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं के साथ दौड़ते हुए नजर आ रहे हैं। उनके साथ उस समय कोई सुरक्षाकर्मी दिखाई नहीं देता, बावजूद इसके वह स्वयं आगे रहकर स्थिति पर नजर रखते दिख रहे हैं। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और अधिकारी की मौके पर सक्रिय मौजूदगी की चर्चा हो रही है…इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन के सामने चुनौती दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के साथ-साथ शिकायतकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर देने की थी। पहले दिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था संभाली तो दूसरे दिन प्रशासन ने शिकायत सुनकर जांच की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया। यही बदलाव इस प्रकरण को महज राजनीतिक संगठनों के टकराव से आगे ले जाकर प्रशासनिक जांच के चरण में पहुंचाता है। अब तीन दिन बाद होने वाली जांच और उसके निष्कर्ष पर पूरे मामले की अगली दिशा निर्भर करेगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की सक्रियता से विवाद को बढ़ने से रोकने तथा शिकायत को निर्धारित प्रक्रिया में लेने की तस्वीर सामने आई है।



