आधे घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार, सड़क पर तड़पते घायल की जिंदगी से खिलवाड़
हादसे में घायल तड़पता रहा, एंबुलेंस नदारद रिक्शे से अस्पताल पहुंचाने की कोशिश, पुलिस पहुंची तो मिली जिंदगी को मदद
रायबरेली/डलमऊ। स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उस समय फिर सामने आ गई, जब डलमऊ थाना क्षेत्र में दो बाइकों की भिड़ंत के बाद घायल युवक सड़क किनारे काफी देर तक तड़पता रहा, लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी…करीब आधे घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते घायल को जब एंबुलेंस का इंतजार लंबा होता गया तो मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह रिक्शे से उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। जिस व्यवस्था में गंभीर सड़क हादसे के घायल को तत्काल एंबुलेंस मिलनी चाहिए, वहां रिक्शे के सहारे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश स्वास्थ्य महकमे की आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की बदहाली की तस्वीर सामने लाती नजर आई…सवाल यह है कि जब सड़क पर घायल की हालत बिगड़ रही थी तो जिम्मेदार एंबुलेंस सेवा आखिर कहां थी…? घटना डलमऊ थाना क्षेत्र में मधुकरपुर के अश्वनी ढाबे के पास की है, जहां दो बाइकों के बीच टक्कर हो गई। हादसे में रायबरेली निवासी आसिफ अली के घायल होने की जानकारी सामने आई है… बताया गया कि आसिफ अली के सीने में चोट आई और वह सड़क किनारे तड़पते रहे। मौके पर मौजूद राहगीरों ने एंबुलेंस के लिए कई बार फोन किया, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची….इस दौरान घायल की हालत को लेकर मौके पर मौजूद लोगों में बेचैनी बनी रही। सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि घायल को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के बजाय करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा….हालात ऐसे बने कि लोगों को एंबुलेंस का इंतजार छोड़ किसी तरह रिक्शे से घायल को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करनी पड़ी….सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में एंबुलेंस सेवा की यह कथित देरी महज लापरवाही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य महकमे की आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है….मामले की जानकारी जब किसी तरह डलमऊ पुलिस तक पहुंची तो पुलिस ने तत्परता दिखाई। डलमऊ थाने से दिवाकर, दिनेश मिश्रा समेत तीन-चार सिपाही चंद मिनट में मौके पर पहुंच गए….पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभाली और एंबुलेंस का इंतजार लंबा खिंचने पर घायल को सीएचसी डलमऊ पहुंचाने में मदद की…अस्पताल पहुंचने के बाद बिगड़ती स्थिति को काबू में किया जा सका…घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य महकमे की एंबुलेंस व्यवस्था और उसके जिम्मेदारों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य हादसे में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाना है, उसी के इंतजार में घायल का सड़क किनारे तड़पते रहना और फिर रिक्शे से अस्पताल पहुंचाने की कोशिश होना व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। सवाल यह भी है कि राहगीरों द्वारा लगातार फोन किए जाने के बावजूद एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंची और इस देरी की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी…?एक ओर सूचना मिलते ही डलमऊ पुलिस के जवान चंद मिनट में मौके पर पहुंचकर घायल की मदद में जुट गए, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस सेवा की कथित देरी ने स्वास्थ्य महकमे की तैयारियों और आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल दी। हादसा बड़ा रूप ले लेता या घायल की हालत और बिगड़ जाती तो उस स्थिति में जवाबदेही किसकी होती यह सवाल घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे की एंबुलेंस व्यवस्था के सामने खड़ा है।



