जिस आंगन में बेटी के कदमों की आहट से घर गुलजार रहता था, उसी आंगन ने परिवार से उसकी जिंदगी छीन ली। रक्षाबंधन की खुशियों के बीच यशी की दर्दनाक मौत ने पूरे परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी टीस शायद कभी कम नहीं होगी। मां-बाप की आंखों के आंसू थम नहीं रहे और घर की खामोशी बेटी की यादों को और गहरा कर रही है। इस दुख की घड़ी में समाजसेवी अखिलेश सिंह राठौर पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि इस मुश्किल वक्त में परिवार खुद को अकेला न समझे। उन्होंने तत्काल 50 हजार रुपये नकद और करीब 50 हजार रुपये की घरेलू उपयोग की सामग्री देकर परिवार की मदद की।
पुरवामीर गांव में 18 वर्षीय यशी की दर्दनाक मौत के बाद रविवार को समाजसेवी अखिलेश सिंह राठौर पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने मृतका के पिता विनोद कुमार सविता और अन्य परिजनों से मुलाकात कर घटना पर गहरा दुख जताया। परिवार के सदस्यों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी पीड़ा सुनी और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया।
समाजसेवी ने कहा कि बेटी को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। परिवार जिस परिस्थिति से गुजर रहा है, उसमें आर्थिक मदद से ज्यादा जरूरी उनके साथ खड़ा होना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर वह आगे भी परिवार की हरसंभव मदद करेंगे।

फौरी राहत के लिए बढ़ाया हाथ
अखिलेश सिंह राठौर ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत के तौर पर 50 हजार रुपये नकद दिए। इसके अलावा करीब 50 हजार रुपये की घरेलू सामग्री भी उपलब्ध कराई। करीब एक लाख रुपये की इस सहायता का उद्देश्य हादसे के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार को तत्काल सहारा देना रहा।
आठ घंटे चला था रेस्क्यू, फिर भी नहीं बच सकी यशी
गौरतलब है कि शुक्रवार को यशी घर के आंगन में अचानक धंसी करीब 20 से 25 फीट गहरी जमीन में समा गई थी। हादसे की जानकारी मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब आठ घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद यशी को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
बेटी की मौत से टूटे परिवार के लिए यह मदद शायद उस कमी को कभी पूरा नहीं कर सकती, जिसे यशी हमेशा के लिए छोड़ गई है, लेकिन दुख की घड़ी में किसी का हाथ थाम लेना उस परिवार को यह एहसास जरूर दिलाता है कि वह इस दर्द में अकेला नहीं है।



