
चेतावनी बिंदु से 21 सेंटीमीटर ऊपर बह रही गंगा, कटरी में डेढ़ हजार बीघे फसल जलमग्न
रायबरेली। गंगा के जलस्तर में रविवार को 30 सेंटीमीटर की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन इससे फिलहाल बाढ़ का खतरा टला नहीं है। नदी अभी भी चेतावनी बिंदु से करीब 21 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है…जलस्तर के साथ लगातार हो रही बारिश ने कटरी क्षेत्र के किसानों की चिंता और बढ़ा दी है….करीब डेढ़ हजार बीघे में खड़ी धान समेत अन्य फसलें पानी में डूब चुकी हैं, जबकि कई गांवों में पानी संपर्क मार्गों तक पहुंचने से आवागमन प्रभावित होने लगा है….आपदा विभाग से रविवार को मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को गंगा का जलस्तर 98.600 मीटर दर्ज किया गया था, जो रविवार को घटकर 98.570 मीटर रह गया…यानी 30 सेंटीमीटर की कमी आई… बावजूद इसके नदी का पानी 98.360 मीटर के चेतावनी बिंदु से करीब 21 सेंटीमीटर ऊपर है। हालांकि खतरे का निशान 99.360 मीटर है और वर्तमान जलस्तर उससे करीब 79 सेंटीमीटर नीचे है। ऐसे में जलस्तर में मामूली गिरावट राहत जरूर देती है, लेकिन लगातार बारिश के बीच खतरे की आशंका अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
*कटरी में खेत बने तालाब, किसानों पर दोहरी मार*
गंगा के बढ़े जलस्तर और बारिश का सबसे बड़ा असर कटरी क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है…चक मलिकभिती, जमाल नगर मोहद्दीनपुर, जहांगीराबाद, पूरे रेवती सिंह, अंबहा और बबुरा समेत कई गांवों के आसपास खेतों में पानी भर गया है…करीब डेढ़ हजार बीघे धान आदि की फसल जलमग्न होने से किसानों के सामने तैयार होती फसल बर्बाद होने का संकट खड़ा हो गया है..कुछ दिन पहले तक जिन खेतों में धान की फसल लहलहा रही थी, वहां अब पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। कई खेतों की स्थिति ऐसी है कि वे तालाब में तब्दील नजर आ रहे हैं। किसानों को केवल फसल खराब होने की चिंता नहीं, बल्कि उससे जुड़ी लागत और संभावित आर्थिक नुकसान की भी चिंता सताने लगी है…गंगा किनारे बसे ग्रामीण इलाकों में जलस्तर को लेकर बेचैनी बनी हुई है। कई स्थानों पर पानी संपर्क मार्गों तक पहुंच गया है। घाटों के किनारे बने कुछ मकान भी पानी से घिर गए हैं। ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ा तो आवागमन के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि बाढ़ और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। आपदा विभाग तथा संबंधित विभागों की टीमें जलस्तर और प्रभावित इलाकों पर नजर रख रही हैं। कंट्रोल रूम में स्वास्थ्य, राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग के कर्मियों की 24 घंटे तैनाती की गई है। प्रशासन का दावा है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रभावित ग्रामीणों को समय रहते राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल गंगा का 30 सेंटीमीटर नीचे आना राहत का संकेत जरूर है, लेकिन चेतावनी बिंदु से ऊपर बहता पानी और खेतों में खड़ी फसलों का डूबना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले घंटों में बारिश और नदी के जलस्तर की स्थिति ही तय करेगी कि यह संकट सीमित रहता है या बाढ़ की स्थिति और गंभीर होती है।


