लाल सागर में भारतीय वाणिज्यिक पोत एमएसवी फैज-ए-नूर ऑलिया पर हमले के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों पर शक है। जानिए कौन हैं हूती लड़ाके, यमन में कैसे मजबूत हुए और पश्चिम एशिया संकट में इनकी क्या भूमिका है?

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भले ही थोड़ा धीमा पड़ा है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से आने वाले जहाजों की आवाजाही अब भी बुरी तरह प्रभावित है। इस बीच मंगलवार को लाल सागर में एक भारतीय झंडे वाले वाणिज्यिक पोत पर हमला हुआ था। पहले तो यह साफ नहीं हुआ कि युद्ध क्षेत्र से दूर इस अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत के जहाज पर किसने हमला किया। हालांकि, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सरकार ने आरोप लगाया है कि इस हमले के लिए ‘हूती’ विद्रोही संगठन जिम्मेदार हैं।
गौरतलब है कि लाल सागर में हुए इस हमले के बाद कार्गो जहाज एमएसवी फैज-ए-नूर ऑलिया यमन के जलक्षेत्र के पास डूब गया था। इसमें सवार 14 क्रू सदस्यों में से 13 भारतीय और एक यमन का नागरिक था, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। यमन की सरकार ने इस घटना को लेकर हूतियों पर निशाना साधा और नौसेना और कोस्ट गार्ड की मदद से पीड़ितों के लिए राहत-बचाव कार्य चलाया।
पहले जानें- कौन हैं हूती, यमन से इनका क्या कनेक्शन?
हूती यमन में मौजूद एक सशस्त्र समूह है। संगठन का नाम इसके संस्थापक हुसैन बदरेद्दीन अल-हूती के नाम पर रखा गया है। दरअसल, 1990 के दशक में उत्तर यमन में हूती परिवार ने शिया इस्लाम के जायदी संप्रदाय के लिए एक मजहबी पुनरुद्धार आंदोलन की स्थापना की थी। यह वही हूती परिवार था जिसने कभी यमन पर शासन किया था। जैसे-जैसे सरकार के साथ टकराव बढ़ता गया, उन्होंने यमन की राष्ट्रीय सेना के साथ कई गुरिल्ला युद्ध लड़े। इसके अलावा हूतियों का सुन्नी शक्ति का केंद्र माने जाने वाले सऊदी अरब के साथ एक सीमा संघर्ष भी हुआ।
आज हूतियों के पास अनुमानित 20,000 लड़ाके हैं। इसकी अधिकांश मौजूदगी यमन में पश्चिम में है। वहीं इसका प्रभाव यमन के लाल सागर तट तक है।
कैसे ताकतवर हुए हूती?
यमन में 2014 के अंत में युद्ध शुरू हुआ, उसके बाद राजधानी सना पर हूतियों ने कब्जा कर लिया। हूतियों ने उत्तर के अधिकांश भाग और अन्य बड़ी आबादी वाले जगहों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। उधर देश में सत्ता चला रही सरकार ने खुद को अदन में स्थापित कर लिया। इस सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त थी।
लाल सागर में कितने खतरनाक हैं हूती?
लाल सागर यूरोप को एशिया और पूर्वी अफ्रीका से जोड़ने वाला सबसे अहम जलमार्ग है। स्वेज नहर के दक्षिण में स्थित लाल सागर दुनिया के सबसे घने शिपिंग चैनलों में से एक है। लाल सागर यमन समुद्र के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है, जहां यह अदन की खाड़ी से मिलता है।
अमेरिका-ईरान युद्ध के शुरू होने से काफी पहले से हूती विद्रोही लाल सागर में कारोबारी जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इसकी पहली शुरुआत हुई 2023 में इस्राइल-हमास युद्ध के बाद, जब फलस्तीन के गाजा में इस्राइल की कार्रवाई के खिलाफ हूतियों ने लाल सागर पर मिसाइलों और ड्रोन से वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाया। इनमें से अधिकांश हमलों को अमेरिका और इस्राइली सेनाओं ने जवाबी कार्रवाई करके असफल कर दिया। हालांकि, कुछ हमले निशाने पर लगे और जहाजों और उनमें सवार क्रू को रेस्क्यू करना पड़ा।
